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Bolti Anubhutiyan
Specifications
About this Book
आँखें बोलती नहीं — एक समकालीन हिंदी काव्य संग्रह इस संग्रह में, कवि दीपक राय ने उन मौन भाव-धाराओं को उजागर किया है, जिन्हें शब्द नहीं कर पाते, पर आँखें बख़ूबी बयान कर देती हैं। शीर्षक-कविता “आँखें बोलती नहीं” के माध्यम से पाठक उस भीतर की खामोशी से रूबरू होते हैं, जहाँ होंठ शांत हैं किंतु नज़रें खुलकर बोलती हैं। इन कविताओं में मौन संवाद की गहराई, जहाँ आँख-तारे, झपकी भर की चपलता, पलकों की काँपने जैसी सूक्ष्म प्रतिक्रियाएँ भाषा से भी आगे निकल जाती हैं। मन और आँखों के बीच की दूरी, उस पल की अश्रु-सदृश नमी, उस अनकहे एहसास का जिक्र जो शब्दों से अधूरा रह जाता है। प्रेम-भावना का पुनरावलोकन, जहाँ प्रेम केवल महसूस करने की क्रिया नहीं लगता, बल्कि देखने, देखने की चाह रखने और आँखों में खुद को ढूँढने का अनुभव बन जाता है। खामोशी का संवाद, जो इस पुस्तक का मूल विषय-धार है: “लिपि नहीं”, “शब्द नहीं” — पर आँखों-की-भाषा, जो कह देती है वो जो कभी कह न पाई। कवि ने अपनी भाषा काफी सहज रखी है — सरल शब्दों में गहरी अनुभूतियाँ, चित्र-समान भाव-व्यंजना, और अकेलेपन-से-मिलने-वाली-उम्मीद का मेल। यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो शब्दों के बीच के विराम, खामोशियों की आवाज़, और आँखों की भाषा सुनना चाहते हैं। आँखें बोलती नहीं सिर्फ़ कविताओं का संग्रह नहीं — यह एक यात्रा है, जहाँ पाठक अपने भीतर झाँकने लगता है, अपने अनुभवों से जुड़ता है, अपने भीतर के अनकहे-अनसुने को महसूस करता है।